स्वाइन फ्लू के कारण और उपाय ध्यान दे।
स्वाइन फ्लू के लक्षण व उपचार और उपाय ,रोग हालत
स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू एक तेजी से फैलने वाली बहुत ही संक्रामक बीमारी है जिससे बचने के लिए आपको स्वाइन फ्लू के लक्षण व उपचार और उपाय ,रोग हालत इसके बारे में जानकारी होना बेहद आवश्यक है। यहां जानिए स्वाइन फ्लू के उपचार, कारण, लक्षण, और उपाय ,रोग हालत आदि के बारे जाने ?
स्वाइन फ्लू के लक्षण
1. खांसी - सिर दर्द ,छींक आना ,गले में खराश ,आदि लक्षण स्वाइन फ्लू के। 2. जुकाम - नाक से पानी बहना ,दस्त व उल्टी के ,आखों का हल्का लाल होना , आदि लक्षण स्वाइन फ्लू के। 3. बुखार - सांस लेने में कठिनाई ,नाक का भारी होना ,आदि लक्षण स्वाइन फ्लू के। ये लक्षण सर्दियों में सामान्य है परंतु ये स्वाइन फ्लू होने के लक्षण भी हो सकते है बल्कि लक्षण महसूस होने पर घबराएं नहीं , तुरंत डॉक्टर से उपचार प्रारंभ करवाएं।
स्वाइन फ्लू वायरस और जीवाणु
स्वाइन फ्लू के उपचार और उपाय ,रोग हालत
1. फ्लू होने पर यह करे। 2. फ्लू होने पर यह नहीं करे।
1. फ्लू होने पर यह करे।
खांसते या छींकते समय अपने मुंह व नाक को रुमाल या टिशु पेपर से ढ़क कर रखें। अपनी नाक ,आंखे या मुँह को छूने से पहले और बाद हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोएं। खांसी ,बहती नाक ,छींक बुखार जैसे फ्लू के लक्षणों से प्रभावित लोगों से दुरी बनाएं। भरपूर नीद ले ,निरंतर डॉक्टर के सम्पर्क में रहें। खूब पानी पियें व पौष्टिक भोजन खाएं। घर के दरवाजों के हैंडल ,की -बोर्ड ,मेज इत्यादि को साफ रखें।
2. फ्लू होने पर यह नहीं करे।
डॉक्टर से पूछे बगैर कोई भी दवाएं नहीं ले। इस्तेमाल किए गये टिश्यू या रुमाल को खुले में नहीं डालें। स्वाइन फ्लू प्रभावित जगह पर बिना फेस माँस्क लगाए नहीं जाएं। रोगी से हाथ नहीं मिलाएं ,गले नहीं मिले। घर के आसपास गंदगी नहीं फैलाएं। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। बिना मांस्क स्वाइन फ्लू रोगी के नजदीक नहीं जाएं।
कैसे पहचानें कि आपको स्वाइन फ्लू है ये है 7 संकेत
- सामान्य फ्लू में सर्दी -खांसी और सामान्य बदन दर्द होता है। स्वाइन फ्लू में तेज बुखार , सिर दर्द , उलटी का अहसास ,डायरिया भी होता है।
- सामान्य फ्लू के सिम्प्टल धीरे -धीरे बढ़ते है। स्वाइन के सिम्प्टल और तकलीफ बहुत जल्दी कुछ ही घंटो में बढ़ जाता है।
- सामान्य फ्लू या कॉमन कोल्ड में अक्सर सिर -दर्द नहीं होता और स्वाइन फ्लू के 80 %से ज्यादा मामलो में तेज सिर -दर्द भी होता है।
- सामान्य फ्लू में आमतौर पर गले की खराश भी होता है। स्वाइन फ्लू में आमतौर पर गले की खराश के बजाय चेस्ट प्रॉब्लम ज्यादा होता है।
- सामान्य फ्लू का वायरस छोटे बच्चो और प्रेगनेंट लेडीज को ज्यादा प्रभावित करता है। इनके सिम्प्टम्स को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
- एक ही इलाके में इस तरह के सिम्प्टम्स कई लोगो में नजर आ रहे हो तो स्वाइन फ्लू फैलने की संभावना ज्यादा हो सकती है।
- अगर सर्दी -खांसी बुखार ,नाक बहना ,चेस्ट प्रॉब्लम सिर -दर्द ,उल्टी और डायरिया की प्रॉब्लम बनी रहे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
स्वाइन फ्लू रोग क्या है।
- स्वाइन फ्लू एक तीव्र और बहुत ही सक्रामक रोग है ,जो एक विशिष्ट प्रकार के जीवाणु एंफ्लुएंजा वाइरस (एच -1 एन -1 ) के द्वारा फैलता और होता है।
- स्वाइन फ्लू में प्रभावित व्यक्ति में सामान्य मौसमी सर्दी -जुकाम जैसे ही लक्षण होते है। जैसे :
खांसी - सिर दर्द ,छींक आना ,गले में खराश ,आदि लक्षण स्वाइन फ्लू के। जुकाम - नाक से पानी बहना ,दस्त व उल्टी के ,आखों का हल्का लाल होना , आदि लक्षण स्वाइन फ्लू के। बुखार - सांस लेने में कठिनाई ,नाक का भारी होना ,शरीर दर्द ,थकान ,ठंड लगना ,पेटदर्द आदि लक्षण स्वाइन फ्लू के।
स्वाइन फ्लू कम उम्र के व्यक्तियों छोटे बच्चों तथा गर्भवती महिलाओ को यह तीव्र रूप से प्रभावी करता है।
स्वाइन फ्लू संक्रमण रोगी व्यक्ति के खांसने ,छींकने आदि से निकली हुई द्रव की बूंदो से होता है। स्वाइन फ्लू रोगी व्यक्ति मुंह या नाक पर हाथ रखने के पश्चात जिस भी वस्तु को छूता है , पुनः उस संक्रमित वस्तु को कोई स्वस्थ व्यक्ति द्वारा छूने से रोग का संक्रमण हो जाता है।
संक्रमित होने के पश्चात 1 से 5 दिन के अंदर लक्षण उत्पन हो जाते है।
click स्वाइन फ्लू किन व्यक्तियों में अधिक होने की संभावना है :- कमजोर व्यक्ति ,बच्चे ,गर्भवती महिलाएं ,वृद्धजन एवं जीर्ण रोगों से ग्रसित व्यक्तियों में स्वाइन फ्लू हो सकता है।
स्वाइन फ्लू की दवा टैमी फ्लू का कोई साइड इफेक्ट नहीं है। `
म्यूटेशन होता ही है , इसलिए वेक्सीनेशन जरूरी
सर्दियों में स्वाइन फ्लू के केस बढ़ते ही है। पिछले कई सालों से टयूरिस्ट बढ़ना ,फेस्टिवल आ रहे है। ऐसे में लोग घरो से निकलते है और पब्लिक प्लेस जाते ही है। इस वजह से एक -दूसरे में तेजी से बीमारी बढ़ती है। इन्फ्लुएंजा का म्यूटेशन होता ही है। गर्भवती महिलाओं ,नवजात ,बुजुर्ग ,डायबिटीज और अस्थमा पीड़ितों को इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए और वेक्सीनेशन कराना चाहिए। साथ ही अस्पतालों में काम करने वाले स्टाफ को भी वेक्सीनेशन कराना चाहिए। click




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