कई बीमारियाँ ,एक कारण :मोटापा
मोहकबेरियाट्रिक्स एंड रोबोटिक्स से बेहतर कौन जानेगा इसका इलाज
मोटापा आपके शरीर को बीमारियों का घर बना देता है। सामान्य रूप से सिर्फ 10 किलोग्राम अधिक वजन वाले व्यक्ति की आयु में तीन वर्ष की कम हो सकती है ,तो इससे ज्यादा वजन वाले व्यक्तियों का क्या कहना। अनियंत्रित रूप से बढ़ता वजन शरीर के सारे अंगो पर हानिकारक प्रभाव डालता है। इसके कारण डायबिटीज ,हाई ब्लड प्रेशर ,स्लीप एपनिया ,आँस्टिओ अर्थराइटिस ,सीओपीडी ,बांझपन ,दिल की बीमारी जैसी करीब 30 खतरनाक बीमारियों शरीर को जकड़ लेती है। कई मामलों में यह जानलेवा भी साबित होता है।
अगर आप भी गंभीर मोटापे की चोट में है तो बैरियाट्रिक सर्जरी एक सरल माध्यम है जिससे आप आसानी से अपना वजन कम कर मोटापे के दुष्परिणामों से बच सकते है।
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गंभीर मोटापे से परेशान व्यक्तियों के लिए बैरियाट्रिक सर्जरी से जुडी जरूरी बातें
बैरियाट्रिक सर्जरी क्यों जरूरी है ?
बैरियाट्रिक सर्जरी गंभीर मोटापे से परेशान व्यक्ति जिन्हे 30 से 100 किलो तक वजन कम करने की आवश्यकता है उन लोगों के लिए यह कारगर तकनीक है। वैज्ञानिक पध्दतियों में बैरियाट्रिक सर्जरी मोटापा एवं उससे जुड़े अन्य रोग जैसे ब्लड प्रेशर ,जोड़ों में दर्द ,स्लीप एपनिया ,डायबिटीज़ इन सभी से भी छुटकारा पाने का एक विश्वसनीय उपाय है।
क्या सर्जरी के बाद वज़न फिर बढ़ता है ?
मोटापे के इलाज के लिए यदि रोबोट द्वारा बैंडेड गैस्ट्रिक बायपास सर्जरी की जाए ,तो बैंड घटे वज़न को नियंत्रण में रखने में मदद करते है।
सर्जरी के बाद नॉर्मल लाइफ में कब लौट सकते है ?
सर्जरी के चार से पाँच घंटो के बाद मरीज चल -फिर सकता है तथा तीसरे दिन अस्पताल से अवकाश कर दी जाती है। उसके बाद मरीज अपनी दिनचर्या में लौट सकता है। इस ऑपरेशन की खास बात यह है की इसमें कोई बेड रेस्ट नहीं होता है।
सर्जरी के बाद डाइट में क्या बचाव होते है ?
मरीज को केवल तीन हफ्तों तक अस्पताल द्वारा दी गई डाइट फॉलो करनी होती है।
क्या सर्जरी में पेट के बाहर कोई निशान आता है ?
मोटापे की सर्जरी सामान्य 3 से 4 छिद्रो के माध्यम से की जाती है किन्तु मोहक में यह सर्जरी केवल एक सूक्ष्म छिद्रो के माध्यम से की जाती है। इस सर्जरी को सिल्स (सिंगल इंसीजन लेप्रोस्कोपी ) कहते है। इसमें नाभि में 1.5 सेमी मीटर का एक छोटा छिद्र कर सर्जरी के सभी निशान नाभि में ही छुपा दिए जाते है।
15 से 25 किलो तक बिना सर्जरी वजन कम करने के लिए एंडोस्कोपी पध्दति
वजन कम करने की एक ऐसी भी प्रक्रिया है जिसमे सर्जरी की कोई आवश्यकता नहीं होती ,इस तकनीक को ई.एस.जी. कहते है।
क्या है ई.एस.जी. ?
एंडोस्कोपिक स्लीव गैस्ट्रोप्लास्टी उन लोगों के लिए एक बेहतर विकल्प है जो बाकी बैरियाट्रिक सर्जरी नहीं करवा सकते। ई.एस.जी.अन्य सर्जरी की तुलना में काफी नई है। इस प्रक्रिया में एंडोस्कोप की मदद से मुंह के रास्ते जाकर पेट के आकार को छोटा किया जाता है ताकि भोजन शरीर की आवश्यकता अनुसार ही पेट मे जा सके साथ ही पेट का आकार को छोटा होने के कारण थोड़े ही भोजन में संतुष्टि का अहसास भी हो जाता है। इसमें शरीर पर कोई चीरा निशान नहीं आता जिसके कारण मरीज की रिकवरी भी तेजी से होती है। ई.एस.जी. में भी स्लीव गेस्टरेक्टॉमी की तरह पेट का आकार छोटा किया जाता है। लेकिन पेट के बचे हिस्से को शरीर से बाहर नहीं निकाला जाता है। यही दोनों में एक महत्वपूर्ण अंतर् है।
ई.एस.जी. प्रक्रिया में 30 -45 मिनट लगते है। मरीज 4 से 5 घंटे बाद चलने फिरने में सक्ष्म होता है और दूसरे ही दिन से वो अपनी दैनिक दिनचर्या में भी लौट सकता है इस तकनीक में बेड रेस्ट की भी आवश्यकता नहीं होती है। यह तकनीक उन लोगो के लिए वरदान है जो अपने शरीर का 20 % कम करना चाहते है और सभी तरह की डाईट या एक्सरसाईज से नहीं कर पा रहे है।



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