मधुमेह रोग का आंखों पर प्रभाव जाने | Get Latest Health Articles on

by - फ़रवरी 10, 2019

मधुमेह रोग का आंखों पर प्रभाव, जाने कैसे ?

 आंखों पर प्रभाव


मधुमेह होने पर जिन बातों पर विशेष ध्यान दिए जाने का कहा जाता है ,उसमें आंखों का ख्याल मुख्य है। इसकी वजह है रैटिनल डिटैचमेंट।  

रैटिना एक प्रकाश संवेदी टिशू परत है जो हमारी आंखों के पिछले भाग में होती है। यह ऑप्टिक नर्व के द्वारा मस्तिष्क को संदेश भेजने का कार्य करती है। 

जब रैटिना अपनी सामान्य जगह से खिसक जाता है तो इस स्थिति को रैटिनल डिटैचमेंट कहते है। यदि वक्त पर और सही तौर पर इसका इलाज न किया जाए तो आंखों की रौशनी सदा के लिए जाने का खतरा होता है। 

लक्षण 

मधुमेह के मरीज को द्र्ष्टि जाने का एहसास हो सकता है ,हालांकि जरूरी नहीं यह पूर्णतः द्र्ष्टिहीनता हो। यह एक या दोनों आंखों में हो सकता है और द्र्ष्टि आंशिक या पूर्ण रूप से जा सकती है। 
पेरिफेरल विजन या द्र्ष्टि में धुंधलापन आ सकता है। आंखों के सामने काले रंग के तैरते धब्बों का दिखाई देना या आँखों में रोशनी चमकना भी गम्भीर स्थिति का संकेत हो सकता है। 
अचानक अंधेरा छा जाना। इसकी अवधि कुछ सेकंड्स ,कुछ मिनट या कुछ घंटे भी हो सकती है। यदि सही तरीक़े इ इलाज न मिले तो पूरी तरह से द्र्ष्टिहीनता का ख़तरा रहता है।

ये सावधानियां बरतें 

मधुमेह रोगी और उच्च रक्तचाप के मरीजों को एहतियातन हर साल रैटिना की जाचं करवानी चाहिए।
कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को मापने वाला लिपिड -प्रोफाइल टेस्ट प्रतिवर्ष करवाएं। यह जाचं शरीर में मौजूद अच्छे और बुरे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा की विस्तार से जानकारी उपलब्ध करवाता है ,क्योकि इन मात्राओं का असंतुलन आंखों में इस तरह की परेशानी का कारण बन सकता है।
रक्त में शर्करा के स्तर को नियमित तौर पर जांचते रहना चाहिए और हर तीन माह में एचबीए1सी जाचं करवानी चाहिए ,क्योकि मधुमेह रोगी में रक्त वाहिकाएं कमज़ोर हो जाती है ,जिस कारण व्यक्ति इसकी जद में आ सकता है।

विभिन कारण 

रैटिना में क्षति मधुमेह के प्रति लापरवाही का एक प्रमुख असर है। आंखों के भीतर 'विट्रियस जेल' होता है, जिसमें ख़ून रिसने के कारण भी यह स्थिति उत्पनं हो सकती है। इसे विट्रियस हैमरेज कहा जाता है। यह आखों तक पहुंचने वाली रोशनी का रास्ता रोकता है जिससे अकस्मात धुंधलापन या आंखों के सामने धब्बे दिखाई देने लगते है। कुछ मामलों में स्ट्रोक या ब्रेन ट्यूमर के कारण भी यह दृष्टिदोष हो सकता है। 
जिन्हे पास का चश्मा लगा हो या फिर एक आखं में पहले से परेशानी हो या मोतियाबिंद का ऑपरेशन या आंखों में कोई चोट हो तो रैटिनल डिटैचमेंट का ख़तरा बढ़ जाता है। 

उच्च रक्तचाप के मरीजों को हर 10 -15 दिनों के भीतर रक्तचाप की जांच करवाना चाहिए और यदि इसमें निरंतर बढ़ोतरी हो रही हो तो तुरंत चिकित्स्कीय परामर्श लेना चाहिए। 



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